लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है, लेकिन कांग्रेस अपनी चुनावी पराजय को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास का माहौल बनाने में जुटी है। जनता के निर्णय पर सवाल उठाने और हार का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ने की राजनीति को अब तथ्यों के साथ जनता के सामने बेनकाब किया जाएगा।इसी उद्देश्य से Bharatiya Janata Party (BJP) 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रदेशभर में दो चरणों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान चलाएगी। प्रथम चरण 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तथा द्वितीय चरण 11 नवंबर से 30 नवंबर तक संचालित होगा। इस दौरान प्रदेश के सभी 13 जनपदों में पदयात्राओं और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच पहुंचकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी और केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है और सरकार की आलोचना करना उसका अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा, अराजकता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। लोकतंत्र की आड़ में अव्यवस्था फैलाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर जवाब दिया जाएगा।
भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान, 13 जिलों में पदयात्रा और जनसंवाद करेगी पार्टी
