उत्तराखंड में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर कांग्रेस और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच तीखा राजनीतिक घमासान चल रहा है 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा रहा है कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने इस कानून को परिसीमन और जनगणना की शर्तों से जोड़कर इसे 2029 तक टाल दिया है, जो महिलाओं के साथ धोखा है कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर आरक्षण नीति को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर महिलाओं को धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि यह उनकी एक ‘पूर्व नियोजित साजिश’ है भाजपा ने 2023 के महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन से जोड़ दिया जबकि उसे पता था कि परिसीमन पर अभी तक राष्ट्रीय सहमति नहीं बन पाई है उत्तराखंड की सियासत में महिलाओं की भूमिका को आंकड़ों और इतिहास के लिहाज से देखें तो दोनों में एक बड़ा विरोधाभास नजर आता है प्रदेश की मतदाता सूची में महिलाएं कुल मतदाताओं की करीब आधी आबादी है मतदान के मामले में भी महिलाएं लगातार पुरुषों से आगे रही हैं लेकिन जब बात चुनाव लड़ने, राजनीतिक दलों से टिकट हासिल करने और विधानसभा में पहुंचने की आती है तो उनकी संख्या काफी कम हो जाती है राज्य गठन के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनावों का इतिहास बताता है कि महिला उम्मीदवारों की संख्या में धीरे-धीरे इजाफा तो हुआ, लेकिन यह बढ़ोतरी उस गति से नहीं हुई, जिस गति से महिलाओं ने मतदाता और सामाजिक शक्ति के तौर पर अपनी जगह बनाई है
उत्तराखंड में महिला आरक्षण पर सियासी घमासान…
