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उत्तराखंड की विकास यात्रा में उद्योग जगत बने भागीदार: धामी

मुख्यमंत्री धामी ने ‘उत्तराखंड सीएसआर डायलॉग’ कार्यक्रम में उद्योग जगत से राज्य के समग्र विकास में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में सीएसआर के माध्यम से किया गया योगदान केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि पुण्य का कार्य भी है। उन्होंने उद्योग समूहों से उत्तराखंड में ही अपने सीएसआर फंड का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का साझा संकल्प है। कार्यक्रम के दौरान कौशल विकास, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम विकास और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए तथा कई नई परियोजनाओं की घोषणा भी की गई।उन्होंने कहा कि पर्वतीय और सीमांत राज्य होने के कारण उत्तराखंड की विकास संबंधी चुनौतियां अन्य राज्यों से अलग हैं। इसलिए सरकार रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और आधारभूत विकास के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में कॉरपोरेट जगत की विशेषज्ञता और सामाजिक प्रतिबद्धता अहम भूमिका निभा सकती है।मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि वर्ष 2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य को 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनमें से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो सिस्टम, 30 से अधिक उद्योग समर्थक नीतियों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड जैसी पहलों से उत्तराखंड निवेशकों की पसंद बन रहा है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, जिससे उद्योगों को पारदर्शी और सुगम माहौल मिला है। सरकार उत्तराखंड को देश का अग्रणी इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

इन कंपनियों के साथ हुए एमओयू:

किया, हुंडई, इंफोसिस फाउंडेशन, ओएनजीसी, आईटीसी, महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी लिमिटेड, आदित्य बिरला कैपिटल, फिनोलेक्स और पैनासोनिक।