मुख्यमंत्री धामी ने हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास हेतु आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव हैं। प्रदेश के सभी विकासखंडों में 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ना ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण प्रयास है।मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएं जनभागीदारी और स्थानीय जरूरतों के आधार पर तैयार हों तथा पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को संसाधन, तकनीक और आधुनिक सुविधाओं से मजबूत किया जा रहा है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति और जियो टैगिंग से पारदर्शिता बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और उसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रदेश की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 की मरम्मत हुई है, जबकि एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण किया जा चुका है।उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पाद और पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में रोजगार बढ़ाना, पलायन रोकना, स्वच्छता और पारदर्शी विकास सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। जनभागीदारी और पंचायत प्रतिनिधियों के प्रयासों से विकसित उत्तराखंड का संकल्प साकार किया जाएगा।
