बीजेपी प्रवक्ता रविंद्र जुगरान ने ग्राउंड निरीक्षण के बाद पिलर्स की नींव और जमीन के कटाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कुछ पिलर्स ऐसे स्थानों पर खड़े हैं, जहां बेस कमजोर है और भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है।यानी जिस रोपवे को पहाड़ों की नई रफ्तार और पर्यटन की नई तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है, उसके पिलर्स की मजबूती पर ही सवाल खड़े हो गए हैं इसके बाद हमने पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला की भी बात सुनी उन्होंने साफ कहा कि पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सबसे अहम है परियोजना तभी फायदेमंद होगी, जब वह पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप हो साथ ही उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़ी हर जानकारी पब्लिक डोमेन में होनी चाहिए, ताकि आम जनता को भी पता रहे कि आखिर काम किस स्थिति में है अब बड़ा सवाल यही है—क्या रोपवे के पिलर्स यात्रियों का भार उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं?क्योंकि सवाल सिर्फ एक परियोजना का नहीbसवाल है पहाड़ों में सफर करने वाले हर यात्री की सुरक्षा का हैं पुरुकुल मसूरी प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 285 करोड़ है और प्रति घंटा 1000 लोग रोपवे से मसूरी आ सकेंगे इसकी दूरी लगभग 5. 58 किमी है ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से इस परियोजना के लिए सभी मानक पूरे किए जाने अनिवार्य हैं
मसूरी-देहरादून रोपवे परियोजना के पिलर्स अब सवालों के घेरे में हैं
