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कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से जुड़े एक न्यायिक मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए

देहरादून में आज उत्तराखंड कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से जुड़े एक न्यायिक मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।कांग्रेस का दावा है कि CRLR/344/2025, विकेश सिंह नेगी बनाम स्टेट ऑफ उत्तराखंड मामले में 8 सितंबर को बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित किया गया था। कांग्रेस के मुताबिक, इसके बावजूद 11 सितंबर को मंत्री गणेश जोशी ने मीडिया के सामने अपने पक्ष में फैसला आने की बात कही।कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब अदालत की ओर से फैसला सार्वजनिक रूप से सुनाया नहीं गया था, तो मंत्री को कथित तौर पर फैसले के परिणाम की जानकारी कैसे मिली?कांग्रेस ने 15 सितंबर के हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा से जुड़े सवालों का जवाब मांगना है।प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सुजाता पॉल, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल और अधिवक्ता एवं कांग्रेस प्रवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने इस मामले में जांच की मांग की।कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गणेश जोशी को मंत्री पद से हटाने अथवा जांच पूरी होने तक उनके पद पर बने रहने की उपयुक्तता पर निर्णय लेने की मांग भी की है। साथ ही विधायक पद की सदस्यता को लेकर सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी से कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई है।वहीं, इस पूरे मामले में अंतिम न्यायिक स्थिति और लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित न्यायालय के आधिकारिक रिकॉर्ड तथा संबंधित पक्षों के जवाब से ही स्पष्ट होगी।अब देखना होगा कि इस मामले पर सरकार और स्वयं मंत्री गणेश जोशी की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।